ऊँ शं शनैश्चराय नम:
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शनि व्रत विधि
व्रत शुरू करने के लिए उत्तम दिन - शुक्ल पक्ष का शनिवार
कितने व्रत करे - 11 या 51 तत्पश्चात उद्यापन
  1. सूर्योदय से पहले उठकर नित्यक्रम से निवूत्त हो घर में गंगा जल के छींटे दे |
  2. स्नान के उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें, वस्त्र नीले हो तो बेहतर है |
  3. तेल, तिल व उडद लोहे के कटोरे में रखें |
  4. 2 तरह के काले या नीले फूल, 2 कपडे, भात, काले उडद व तिल शनिदेव को अर्पण करें |
  5. व्रत कथा, मन्त्र, आरती ब शनि चलीसा का पाठ करें
  6. शनि मंदिर में सुबह व शाम दर्शन करें |
  7. शाम को उडद की दाल, भात से व्रत खोले, उससे पहले भिखारी को दान कर सके तो उत्तम हैं |
  8. व्रत सूर्यास्त के 2 घंटे बाद खोले व भोजन ग्रहण करें |
शनिदेव उद्यापन
विधिपूर्वक 11 या 51 व्रत पूर्ण होने के उपरांत आने वाले शुक्ल पक्ष के शनिवार को व्रत का उद्यापन करना चाहिए |
  1. प्रात: काल बहामुहूर्त में कर समस्त घर में शुद्ब जल / गंगा जल के छींटे दे |
  2. विद्बान पंडित जी से हवन कराए | हवी में 108 बार शनि बीज मंत्र का जाप कर आहुति दे |
  3. जाग्रत शनि मन्दिर में जाकर 1, 5 या 15 किलो तेल से तेलाभिषेक करे |
  4. सोने व चांदी का छ्त्र शनिदेव को अर्पित करे |
  5. सामर्थ्य अनुसार मंदिर में प्रसाद (हलवे व काले चने) अथवा भण्डारे का वितरण करें |
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