ऊँ शं शनैश्चराय नम:
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शनैश्चरी अमावस

शनिचर के दिन यह अमावस होती है | आम तौरपर साल भर में दो या तीन अमावस आती है |शक्रवार की रात बारह बजेसे शनिचर रात १२ बजे तक यहाँ पूजन-अर्चन, अभिषेक चलता रहता है | देवस्थान की ओर से महापूजा की जाती है | दर्शनार्थियों का स्त्रोत निरंतर चलता रहता है | करीब ८ से १० लाख लोग २४ घण्टे में आते रहते है | भीड़ के कारण सभी भक्तो को चबूतरे पर दर्शन के बजाय नीचे से ही दर्शन की अपेक्षा होती है |

शनि अमावस्या का महत्व इसीलिए है सूर्य की सहस्त्र किरणों में जो प्रमुख है, उसका नाम 'अमा' है | 'अमा' नाम की प्रधान किरण के ही तेजसे सूर्यदेव तीनों लोगों को प्रकाशित करते है | प्रस्तुत 'अमा' में तिथि विशेष को चंद्रदेव निवास करते है , अत: इसका नाम शनि अमावस्या है | फलस्वरूप अमावस्या प्रत्येक धर्म कार्य के लिए अक्षय फल देने वाली बताई गई है | श्राध्द कर्म में तो इसका विशेष महत्व है |


 

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